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राजस्थान की झीलें - Rajasthan lakes
17, Mar 2020 1496

राजस्थान की झीलें - Rajasthan lakes

राजस्थान मतलब रेगिस्तान, राजाओ का गढ़ लेकिन क्या आप जानते हो राजस्थान देश में जल संसाधनों की सबसे बड़ी कमी का सामना करता है। राजस्थान की अधिकांश जनसँख्या गांवो में रहती और अधिकतर गांवो में पिने का पानी तक नसीब नहीं होता है। भारत के कृषि योग्य क्षेत्र का 13।88%, जनसंख्या का 5।67% और देश के पशुधन का लगभग 11% है, लेकिन इसमें केवल 1।16% सतही जल और 1।70% भूजल है। इस प्रकार, लगभग 10% भूमि क्षेत्र वाले राजस्थान में देश का लगभग 1% जल संसाधन है।

राजस्थान की झीलें

राजस्थान में दो प्रकार की झीले पाई जाती है खारे पानी की झीले तथा मीठे पानी की झीले।
खारे पानी की झीले मुख्यतः उत्तरी पश्चिमी मरुस्थलीय भाग में पाई जाती है इसे क्षेत्र में टेथिस सागर का अवशेष होना यहाँ की झीलों के खारेपान का मुख्य कारण बताया जाता है।
अरावली के पूर्वी भाग में पाई जाने वाली झीले मीठे पानी की झीले हैं।

खारे पानी की झीलें

सांभर झील:
जयपुर जिले में सांभर में स्थित झील भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है। इसकी लंबाई दक्षिण पूर्व से उत्तर पश्चिम की ओर 32 किलोमीटर है तथा चौड़ाई 3 से 12 किलोमीटर है इसका अपवाह क्षेत्र 500 वर्ग किलोमीटर है। 23 मार्च 1980 को रामसर कन्वेंशन स्थल (वेटलैंड) में सम्मिलित कर लिया गया है।

डीडवाना:
यह झील डीडवाना नागौर में स्थित है जो लगभग 4 किलोमीटर लंबाई में फैली हुई है इस डील में सोडियम लवण बनाया जाता है।

पचपदरा:
बालोतरा बाड़मेर में स्थित 25 किलोमीटर में फैली इस झील में उत्तम श्रेणी का नमक उत्पादित होता है। जिसमें 98% सोडियम क्लोराइड पर जाता है।

फलोदी:
जोधपुर जिले के फलोदी कस्बे में स्थित है।

अन्य झीलें:
लूनकरणसर (बीकानेर), कावोद (जैसलमेर), डेगाना (नागौर), कुचामन (नागौर), कद्दोर, रेवासा (सीकर) आदि।

मीठे पानी की झीले

जयसमंद (उदयपुर):
1685-1691 की अवधि में महाराणा जयसिंह द्वारा इसका का निर्माण गोमती नदी पर बांध बनाकर किया गया। यह 15 किलोमीटर लंबी व 2 से 8 किलोमीटर चौड़ी है। यह मीठे पानी की राजस्थान की सबसे बड़ी तथा एशिया की दूसरी सबसे बड़ी कृत्रिम झील है। इस झील में 7 बड़े टापू हैं जिसमें भील व मीणा रहते हैं। 1950 में सिंचाई सुविधा के लिए झील से दो नेहरें श्यामपुरा एवं भाट (नहर कुल लंबाई 324 किलोमीटर) बनवाई गई।

राजसमंद झील:
1662 ई. में महाराणा राजसिंह द्वारा काकरोली के निकट निर्मित की गई। नौचौकी की पाल इस झील की उत्तरी पाल जहां 25 शिलालेखों पर राजसिंह प्रशस्ति उत्कीर्ण है। जिसमें मेवाड़ का इतिहास संस्कृत भाषा में लिखा है। सन 2000 के जून माह में गत 100 वर्षों में पहली बार यह झील सूख गई थी।

पिछोला झील:
14वीं सदी के अंत में राणा लाखा के काल में एक बंजारे द्वारा उदयपुर के पश्चिम में पिछोला गांव के निकट यह झील निर्मित कराई गई। इसमें दो टापू हैं- जिन पर जगमंदिर व जगनिवास महल है। खुर्रम(शाहजहां) ने विद्रोही विद्रोही दिनों में यही आकर शरण ली थी।

फतेहसागर झील:
राणा फतेह सिंह द्वारा 1888 में उदयपुर में से पुननिर्मित कराया गया था। प्रारंभ में इस तालाब को महाराणा जयसिंह ने सन् 1687 में थूर के तालाब के साथ बनवाया था। यह नहर पिछोला झील से जुड़ी है। इसके बाद की नींव का पत्थर डयूक् ऑफ कनॉट द्वारा रखे जाने से इसका नाम कनॉट बांध है तथा झील फतेह सागर के नाम से प्रसिद्ध है।

पुष्कर झील:
अजमेर से 11 किलोमीटर दूर पुष्कर में स्थित झील जहां हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा को विशाल मेला लगता है।

उदयसागर झील:
महाराणा उदय सिंह द्वारा 1559 से 1564 ई. तक की अवधि में निर्मित की गई। आयड़ नदी भी इसी में गिरती है।

केन्द्र सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय झील सरंक्षण कार्यक्रम में राजस्थान की पांच झीलों क्रमश अजमेर की आना सागर , पुष्कर का पुष्कर सरोवर , उदयपुर की पिछोला और फतेहसागर तथा माउंट आबू की नक्की झील को सम्मिलित किया गया है।